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Anil Agarwal
Sep 2026 • linkedin
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अक्सर मुझसे पूछा जाता है कि मेरी favourite किताब कौन सी है? जीवन जीने के बारे में जो समझा हूँ, जो सीखा है, उसका बहुत बड़ा कारण श्रीमद्भगवतगीता है। जब निराशा घेरती है, तो कृष्ण सारथी बनकर कहते हैं: “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।” कर्म करो, फल की चिंता मत करो। पूर्वांचल और Mathura-Vrindavan की कृष्ण कथाएँ हम सबने बचपन से ही सुनी हैं। शायद इसलिए कृष्ण हमारे लिए सिर्फ़ भगवान नहीं, बल्कि हर मोड़ पर राह दिखाने वाले, अपने से लगते हैं। मेरा अपना अनुभव कहता है कि श्रीमद्भगवतगीता में हमारे बीते हुए कल, हमारे आज और आने…
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